द्रव्यमान संरक्षण का नियम: प्रयोग, समीकरण और लैंडोल्ट का परीक्षण
रासायनिक संयोग के नियम किसे कहते हैं
लैंडोल्ट का ऐतिहासिक प्रयोग (Landolt's Experiment)
| प्रयोग का चरण | द्रव्यमान (Mass) |
|---|---|
| अभिक्रिया से पहले (H-नली + रसायन) | 125.50 ग्राम |
| अभिक्रिया के बाद (H-नली + नया पदार्थ) | 125.50 ग्राम |
प्रयोग की प्रक्रिया:
रासायनिक समीकरण (Chemical Equation):
सिल्वर नाइट्रेट + सोडियम क्लोराइड → सिल्वर क्लोराइड + सोडियम नाइट्रेट
AgNO3 + NaCl → AgCl(s) + NaNO3
(सफेद दही जैसा अवक्षेप)
रासायनिक समीकरण (Chemical Equation):
बेरियम क्लोराइड + सोडियम सल्फेट → बेरियम सल्फेट + सोडियम क्लोराइड
BaCl2 + Na2SO4 → BaSO4(s) + 2NaCl
(सफेद अवक्षेप)
उदाहरण: द्रव्यमान गणना (Numerical Example)
प्रश्न: 16.8 ग्राम NaHCO3 की 12.0 ग्राम CH3COOH से अभिक्रिया कराने पर अवशेष का द्रव्यमान 20.0 ग्राम पाया गया। मुक्त हुई CO2 के द्रव्यमान की गणना कीजिये।
द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार:
अभिकारकों का कुल द्रव्यमान = उत्पादों का कुल द्रव्यमान
रासायनिक अभिक्रिया:
NaHCO3 + CH3COOH → अवशेष (Solid residue) + CO2↑
1. अभिकारकों का कुल द्रव्यमान:
= NaHCO3 का वजन + CH3COOH का वजन
= 16.8 ग्राम + 12.0 ग्राम
= 28.8 ग्राम
2. उत्पादों का कुल द्रव्यमान:
= अवशेष का वजन + CO2 का वजन
= 20.0 ग्राम + X (मान लीजिये CO2 का द्रव्यमान X है)
नियम लागू करने पर:
28.8 ग्राम = 20.0 ग्राम + X
X = 28.8 - 20.0
X = 8.8 ग्राम
उत्तर: मुक्त हुई CO2 का द्रव्यमान 8.8 ग्राम है।
प्रश्न: एक प्रयोग में 10.0 ग्राम कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) को गर्म करने पर 5.6 ग्राम कैल्शियम ऑक्साइड (CaO) और कुछ मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) प्राप्त होती है।
द्रव्यमान संरक्षण के नियम का उपयोग करके मुक्त हुई CO2 का वजन ज्ञात कीजिये?
उत्तर देखने के लिए यहाँ क्लिक करें
संकेत: 10.0 = 5.6 + X
सही उत्तर: 4.4 ग्राम CO2
नियम की वर्तमान में महत्त्व
आधुनिक संदर्भ: क्या यह नियम कभी फेल होता है?
साधारण रासायनिक अभिक्रियाओं में द्रव्यमान हमेशा सुरक्षित रहता है। लेकिन अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत (E=mc²) के अनुसार, नाभिकीय अभिक्रियाओं में द्रव्यमान का कुछ हिस्सा ऊर्जा में परिवर्तित हो सकता है।
अतः आधुनिक विज्ञान में इसे "द्रव्यमान-ऊर्जा संरक्षण का नियम" कहा जाता है।
आधुनिक संदर्भ: क्या यह नियम कभी फेल होता है?
साधारण रासायनिक अभिक्रियाओं में द्रव्यमान हमेशा सुरक्षित रहता है। लेकिन अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत (E=mc²) के अनुसार, नाभिकीय अभिक्रियाओं में द्रव्यमान का कुछ हिस्सा ऊर्जा में परिवर्तित हो सकता है।
अतः आधुनिक विज्ञान में इसे "द्रव्यमान-ऊर्जा संरक्षण का नियम" कहा जाता है।
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इसमें आसान और सरलता से समझाया गया है
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निष्कर्ष:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: द्रव्यमान संरक्षण का नियम सबसे पहले किसने दिया था?
प्रश्न 2: क्या द्रव्यमान संरक्षण का नियम हर जगह लागू होता है?
प्रश्न 3: लैंडोल्ट के प्रयोग में 'H' आकार की नली का ही उपयोग क्यों किया गया?
प्रश्न 4: क्या मोमबत्ती के जलने पर द्रव्यमान कम हो जाता है?
प्रश्न 5: रासायनिक अभिक्रिया में अवक्षेप (Precipitate) बनने का क्या मतलब है?
उत्तर: जब दो विलियनों को मिलाने पर कोई अघुलनशील ठोस पदार्थ बनता है जो नीचे बैठ जाता है, तो उसे अवक्षेप कहते हैं। जैसे लैंडोल्ट के प्रयोग में सिल्वर क्लोराइड का सफेद अवक्षेप बनता है।

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